|
श्री
चम्पालाल उपाध्याय
(यशस्वी व्यक्तित्व के
गतिशील जीवन की
संक्षिप्त झांकी)
जन्म - गाँव
मेहरासर उपाध्यान (तहसील
सरदारशहर) में|
माता पिता -
माता पूज्या भगवानी देवी
एवं पिता पूज्य पंडित
श्री जुहाराराम जी
उपाध्याय|
प्रारम्भिक शिक्षा -
तारानगर एवं राजगढ़ (जिला
- चूरु) में|
हाई स्कूल की
परीक्षा पंजाब
विश्वविद्यालय से प्रथम
श्रेणी में विशेष
योग्यता के साथ 1945 में|
सन् 1946 में रामपुरिया
इंटर कालेज, बीकानेर में
प्रवेश लिया|
सन् 1947 में
कतिपय मित्रों के साथ
बीकानेर राज्य छात्र संघ
की स्थापना|
छात्र संघ के एक मात्र
प्रतिनिधि के रुप में
बीकानेर राज्य प्रजा
परिषद की प्रतिनिधि सभा
के सदस्य|
इन दोनों संगठनो के
माध्यम से स्वतन्त्रता
संग्राम में सक्रिय
योगदान|
सन् 1947 में डूंगर कालेज,
बीकानेर में प्रवेश|
यहां एम.ए., एल.एल.बी. तक
शिक्षा प्राप्त की|
सन् 1948 में बीकानेर राज्य
छात्र संघ के प्रथम खुले
अधिवेशन की अध्यक्षता|
अधिवेशन का उद् घाटन संत
विनोबा भावे द्वारा|
सन् 1951 में डूंगर कालेज
छात्र संघ के अध्यक्ष पद
पर निर्वाचन|
सन् 1951 में जोधपुर में
आयोजित राजस्थान
विधार्थी संघ के प्रथम
अधिवेशन के निर्विरोध
अध्यक्ष निर्वाचित|
सम्मेलन के
स्वागताध्यक्ष थे श्री
बरकतुल्ला खाँ|
राजस्थान विधार्थी
काँग्रेस की
कार्यकारिणी के सदस्य|
लोकनायक श्री जय प्रकाश
नारायण, प्रखर चिन्तक डा.
राम मनोहर लोहिया, "कल्याण"
के आदि संपादक भाईजी श्री
हनुमान प्रसाद पोद्दार
आधुनिक राजस्थान के
प्रमुख निर्माता श्री
मोहनलाल सुखाड़िया,
सुप्रसिद्ध गांधीवादी
विचारक श्री हरिभाऊ
उपाध्याय, सर्वोदय नेता
श्री गोकुलभाई भट्ट,
विश्वविख्यात
ज्योतिर्विद पद्मभूषण
डा. सूर्यनारायण व्यास,
प्रख्यात प्रशासक एवं
शिक्षाविद् पद्मभूषण डा.
मोहनसिंह मेहता, डा.
गौरीशंकर आचार्य, श्री
दयाशंकर क्षेत्रिय जैसे
अनेक प्रमुख महानुभावों
का स्नेह तथा विश्वास
अर्जित किया|
रतनगढ़, सरदारशहर एवं
चूरु में अनेक जन
आन्दोलनों में प्रभावी
भूमिका का निर्वहन|
सन् 1964 में भारत बंद
आन्दोलन में श्री
मुरलीधर व्यास एवं श्री
नरेन्द्रपाल सिंह चौधरी
के साथ चूरु में जेल
यात्रा|
मजदूर आन्दोलनों में
अनेक बार प्रभावी भूमिका
एवं सक्रिय योगदान|
चूरु जिले के
हजारों भूमिहीनों को
राजस्थान नहर क्षेत्र
में भूमि आवंटन में सहयोग|
सन् 1971 तक राजनीति में
सक्रिय भागीदारी |
राजस्थान प्रजा
समाजवादी पार्टी की
प्रान्तीय कार्यकारिणी
तथा संसदीय मंडल के वर्षो
तक सदस्य 1970 के बाद किसी
राजनीतिक पार्टी के
सदस्य नही |
|