श्री गांघी बाल निकेतन  

                       
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          Shri Champa Lal Upadhyay
        श्री चम्पालालजी उपाध्याय 
 
 

   

कर्मशील व्यक्तित्व के धनी :-   श्री चम्पालाल उपाध्याय

  श्री चम्पालाल उपाध्याय रतनगढ़ (राजस्थान) किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं| इस प्रखर प्रेरक व्यक्तित्व के जीवन वृतान्त और उपलब्धियों से समस्त क्षेत्र अवगत है| चूरु जिले के लोग श्री उपाध्याय को सामाजिक एवं शैक्षणिक जगत के देवदूत के रुप में मानते हैं| श्री उपाध्याय क्षेत्र के सामाजिक एवं शैक्षणिक उन्नयन के प्रति सदैव समर्पित रहे हैं|
  नर रत्न श्री चम्पालाल उपाध्याय की जन्मस्थली बनने का श्रेय सरदारशहर तहसील को प्राप्त हुआ| सरदारशहर तहसील के गांव मेहरासर उपाधियान में पंडित जुहारारामजी उपाध्याय की धर्मपत्नी श्रीमती भगवानी देवी की कोख से श्री उपाध्याय ने जन्म लिया
| इस नर शिरोमणि के जन्मदाता वस्तुतः सौभाग्यशाली है| श्री उपाध्याय ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा चूरु जिले के तारानगर व राजगढ़ में ग्रहण की| 1945 में पंजाब विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में हाई स्कूल पास किया| तत्पश्चात् रामपुरिया इंटर कालेज, बीकानेर में दाखिल हुए| 1947 में डूंगर कालेज बीकानेर में प्रवेश लिया | यहाँ एम.ए.एल.एल.बी.तक शिक्षा प्राप्त की|
   विद्यार्थी जीवन में छात्र संगठनो में निरन्तर सक्रिय रहे| बारह वर्ष की अल्पायु में तारानगर बाल संगठन
की स्थापना की| सन् 1946 में कतिपय मित्रों के साथ बीकानेर राज्य छात्र संघ की स्थापना की| छात्र संघ के एक मात्र प्रतिनिधि के रुप में बीकानेर राज्य प्रजा परिषद् की प्रतिनिधि सभा के सदस्य चुने गए| इन दोनों संगठनो के जरिए आजादी की लड़ाई में सक्रिय भाग लिया| 1948 में बीकानेर राज्य छात्र संघ के प्रथम खुले अधिवेशन की अध्यक्षता की इस सम्मेलन का उद् घाटन संत विनोबा भावे ने किया| 1950 में डूंगर कालेज छात्र संघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए|
   राजस्थान के छात्र आंदोलन में भी अग्रिम पंक्ति में रहे| 1949 में राजस्थान विद्यार्थी कांग्रेस के संयुक्त सचिव बने| 1950 में अखिल भारतीय विद्यार्थी कांग्रेस कार्यकारिणी में सदस्य चुने गए| 1951 में जोधपुर में आयोजित राजस्थान विद्यार्थी संघ के प्रथम अधिवेशन के सर्व सम्मति से अध्यक्ष चुने गये| सम्मेलन के स्वागताध्यक्ष श्री बरकतुल्ला खाँ थे|
   श्री उपाध्याय राजस्थान के समाजवादी आंदोलन के सूत्रधारों में से थे| राजस्थान प्रजा समाजवादी पार्टी के संसदीय मंडल तथा कार्यकारिणी के सदस्य भी रहे| इसी अवधि में लोक नायक जय प्रकाश नारायण तथा प्रखर समाजवादी चिंतक डा. राम मनोहर लोहिया के निकट सम्पर्क में आये|
  विद्यार्थी जीवन के बाद श्री उपाध्याय ने 1955 से रतनगढ़ में वकालत प्रारम्भ की और यह नगर ही इनकी कर्मभूमि बन गया| यहां वकालत के साथ राजनिति में सक्रिय रहे| परन्तु संत विनोबा भावे एवं लोक नायक जय प्रकाश नारायण के सम्पर्क व चिन्तन से प्रभावित उपाध्याय सत्ता की राजनीति से धीरे-धीरे विमुख होते गए| सेवा मार्ग का अनुसरण करते हुए समाज सेवा तथा शिक्षा ही उनके जीवन का मुख्य लक्ष्य बन गया|
 
 
शिक्षा के विस्तार और परिवर्द्धन में श्री उपाध्याय ने अपना जीवन लगा दिया| शैक्षिक प्रवृतियों के उन्नयन के लिए वह निरन्तर प्रयत्नशील रहे हैं और आज भी अदम्य उत्साह से इस पुनीत कार्य में संलग्न है| श्री चम्पालाल उपाध्याय उन महान् व्यक्तियों की तरह हैं जिनके लिए साधनों का अभाव कभी आड़े नहीं आया| वह निस्वार्थ भाव से सेवा कार्य में जुटे हुए है|
  लगन-अटूट कार्य निष्ठा, दूरद्दष्टि, समर्पण, उदे्श्यपरकता, नैतिक मूल्यों के प्रति निष्ठावान आदि गुण श्री उपाध्याय में कूट-कूट कर समाहित हैं| उन्हें क्षेत्र के शैक्षिक आन्दोलन का प्रणेता ही नहीं, पर्याय के रूप में स्वीकार किया जाता है| निश्चय ही श्री उपाध्याय ने चूरु जिले की शैक्षिक प्रवृतियों एवं गतिविधियों को स्थायित्व, गत्यात्मकता और स्तरीयता प्रदान की हैं| श्री उपाध्याय समाज सेवी, शिक्षाविद् तथा कानूनवेता हैं| तीनों ही क्षेत्रों में वह अग्रणी हैं|
    

 

                                                                                                                                        

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