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शैक्षिक
आंदोलन के पर्याय
पश्चिमी राजस्थान
के चूरु जिले में
चम्पालाल उपाध्याय
शैक्षिक आंदोलन का
पर्याय बन गए हैं| इस
शख्सियत के प्रयासों से
कमजोर सासरती वाले चूरू
जिले में अनेक शिक्षण
संस्थान फलफूल रहे हैं|
शिक्षा को सामाजिक चेतना
का हथियार मानने वाले
उपाध्याय इस वक्त कम से
कम 15 शैक्षिक निकायों से
जुडे़ हैं| उनका यह
जुडा़व बेहद जज्बाती हैं
और वे इस काम को सतत जारी
रखे हुए हैं|
पिछले कुछ समय
से इस शख्सियत ने चूरु
जिले के रतनगढ़ कस्बे में
कालेज की स्थापना के नेक
काम में हाथ बँटा रखा हैं|
कालेज इस कस्बे की मोटी
जरुरत है और इस मुद्दे पे
वहाँ कई बार आंदोलनों की
आँधी उठती रही हैं|
उपाध्याय के सदप्रयासों
से रतनगढ़ में जल्द ही एक
कालेज आकार लेने वाला है|
सेठ सूरज मल जालान कालेज
के नाम से इमारत खड़ी हो
रही है| इससे कस्बे के
शैक्षिक विकास को एक नया
अवलम्ब मिलेगा|
राज्य के
समाजवादी आंदोलन में एक
असरदार किरदार अदा कर
चुके उपाध्याय ने
राजस्थान के छात्र
आंदोलन को भी
संघर्षपूर्ण योगदान
दिया है| उस वक्त
उपाध्याय प्रांत के
छात्र मंच पर एक ताकत के
रुप में उभरे और संघर्ष
की अगुवाई की|
आजादी की लड़ाई में एक
सिपाही रहे उपाध्याय का
अतीत जानने थोड़ा पीछे
लौटना होगा| 1946 में
बीकानेर राज्य छात्र संघ
की रचना में हाथ बंटाने
वाले उपाध्याय को प्रजा
परिषद में छात्रों का
प्रतिनिधि मानकर सदस्य
नामजद किया गया था| परिषद
में ये इकलौते छात्र
प्रतिनिधि थे| बाद में इन
दो प्रखर मंचो से आजादी
का गान बोलते रहे|
बीकानेर राज्य छात्र संघ
का 1984 में पहला खुला
अधिवेशन सम्पन्न हुआ उद्
घाटन संत विनोबा भावे ने
किया था| उपाध्याय ने इस
छात्र समागम की सदारत की
थी| बाद में उपाध्याय 1951
में बीकानेर के डुंगर
कालेज में छात्र संघ के
अध्यक्ष भी चुने गए| इसके
एक साल बाद ही जोधपुर में
सम्पन्न हुए छात्रों के
प्रांतीय सम्मेलन में
उपाध्याय को निर्विरोध
अध्यक्ष चुन लिया गया|
स्व. बरकतुल्ला खाँ
सम्मेलन के
स्वागताध्यक्ष थे|
राजनीति से विरक्तता
उपाध्याय को शैक्षिक
आंदोलन में खींच लाई और
अब वे इस यज्ञ में प्रण-प्राण
से जुटे हुए हैं| उनकी इस
नेक नीयती का लाभ समाज को
बराबर नसीब हो रहा है| वे
रतनगढ़ को केन्द्र बनाकर
अपनी सेवाओं को अंजाम दे
रहे है|
नारायण बारेठ
नोटः- कालेज 1990 से
प्रारम्भ हो गया|
नवभारत टाइम्स, जयपुर 5
नवम्बर, 1988 |